सोमवार, 6 मार्च 2017

संगीतमय स्तंभों का मंदिर

हमारे देश के आखिरी छोर "कन्याकुमारी" से 13किलोमीटर की दूरी पर स्थित है.... 9वी सदी में निर्मित "स्थानुमलयन सुचिन्द्रम् मंदिर " ...
                   इस अति सुन्दर मंदिर की मुख्य विशेषता है कि,  यह एक मात्र मंदिर है... यहाँ ब्रह्मा,  विष्णु व महेश (त्रिमूर्ति)  को एक ही लिंग रुप में स्थापित किया गया है..........जब मैं इस मंदिर में पहुंचा, तो मंदिर प्रांगण में ही स्थापित भगवान हनुमान जी 18फुट ऊंची मूर्ति को पूरा ही मक्खन से अभिषेक किया हुआ था........ मेरी बदकिस्मती यह रही,  कि पूर्ण जानकारी ना होने के कारण.... मैं इस भव्य मंदिर में स्थित "चार संगीतमय स्तंभों" को नही देख पाया,  ये अपने-आप में अनोखे पत्थर स्तंभ... एक ही चट्टान से बने हुए हैं....जो कि प्राचीन भारतीय भवन निर्माण वास्तुकला की एक अनूठी उदाहरण है...... इन चारों स्तंभों से सितार,  मृदंग,  तंबूरे व जलतंरग के प्रकार ही  अलग-अलग ध्वनि निकलती है,  जो कि प्राचीन समय में इस मंदिर में होने वाली पूजा-अर्चना का एक अहम हिस्सा रहती रही  होगी........ इस बात का ज्ञान मुझ संगीत प्रेमी को बहुत बाद में हुआ...... तो बस, मन मसोस कर रह गया........!!!

बगैर गाइड के पुरातन स्मारक.... सिर्फ पत्थरों का ढेर

जब मैं साँची स्तूप (मध्य प्रदेश) में टिकट ले कर अंदर जाने लगा, तो वहां स्थित एकमात्र गाइड मेरे पास आया, और अपना परिश्रम 300रुपऐ मांगे......तो मैने हंसते हुए कहा.....कि तीन सौ रुपये, लूट मचा रखी है भाई...... परन्तु वह अपना पहचानपत्र दिखा बोले, कि मैं सरकार की तरफ मान्यता प्राप्त गाइड हूँ और मेरा मेहनताना सरकार ने ही मुकर किया है....... मुझे उनका मेहनताना बहुत ज्यादा लगा.... और मैं बगैर गाइड के ही अंदर चला गया..........परन्तु देखने पर कुछ समझ नही आ रहा था, बस ऐसे ही लग रहा था कि, एक सुन्दर बाग में लगा पत्थरों और टूटी-फूटी मूर्तिओं का ढेर.......
फिर क्या था, फिर वापस बाहर आकर, गाइड को साथ लिया.................. अब साँची स्तूप का हर पत्थर, मूर्ति, दीवार मुझ से बात कर रही थी  और मेरी हर बात का जवाब मिल रहा था ,   मुझे उस गाइड ने बोध इतिहास के बारे बहुत जानकारी दी ......और मैंने भी इसके तय मेहनताने के साथ इनाम भी दिया....
                    कहने का तात्पर्य यह हैं कि जब भी कभी कोई इतिहासिक इमारत देखने जाए, तो गाइड अवश्य करे.... नही तो, आप उस इमारत को एक खँडहर की तरह ही देख पाएंगें .......